[vc_row][vc_column][vc_column_text]श्रीयंत्र का भीतरी क्षेत्र खाली हो जिसकी संरचना भी बाहरी संरचना जैसी ही होनी चाहियेे अर्थात् जो अंदर से ऊपर तक खाली हो जिसका निर्माण करना बहुत ही कठिन होता है। भीतरी क्षेत्र का खाली होना ब्रम्हाण्डीय ऊर्जा को आकर्षित करने हेतु अनिवार्य है।ऐसे श्रीयंत्र के अंदर किसी भी वस्तु को रखने से उसकी ऊर्जा स्तर में कई गुना वृद्धि होती है।

उत्पादन तकनीक के अभाव के कारण लोगों ने ठोस श्रीयंत्र का निर्माण किया। वह श्रीयंत्र नही बल्कि श्रीयंत्र की मूर्ति है। एक यंत्र कभी भी अंदर से ठोस नही होना चाहिए।

   
श्रीयंत्र का बाहरी, भीतरी क्षेत्र

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